प्रेम या आकर्षण ........ प्रेम , एक शब्द , अजूबा है आखिरकार यह अपनी परिभाषा पटल की गहरइयो तक बसाये हुआ है...
प्रेम या आकर्षण ........ प्रेम , एक शब्द , अजूबा है आखिरकार यह अपनी परिभाषा पटल की गहरइयो तक बसाये हुआ है...
जिंदगी की इस कशमकश की एक जंग , अर्ज़ करना चाहता हूँ | दिल वीरान है अब तक मेरा , बस इसमें जिंद...
समय अपनी क़रवटें ले रहा है और परिवर्तन अपनी ढाल ....।परिवर्तन अपनी घटाए बिखरा ही देता है चाहे वो संस्कार हो या संस्कृति ।परिवर्तन समय स...